Wednesday, July 18, 2012

औरत


गर्भ से आई एक आवाज़ 
माँ तुम मुझसे क्यूँ हो नाराज़ |

पाप क्या ऐसा मेने किया
कि हो रही मेरी भ्रूण हत्या |

इस दुनिया मे आना चाहती हूँ
रंगो मे रंग जाना चाहती हूँ |

कुछ पाना है, कुछ बनना है
दुनिया में कुछ करके जाना है |


बेटी, पाप तुमने कोई नही किया
पर दुनिया का अन्याय भी नहीं सहा |

माना हम है जन्म दाता 
लेकिन कहाँ कोई हमारी सुनता |

इस दुनिया में तुम कदम रखलो
उससे पहले औरत की व्यथा सुनलो | 

बाप से सहम के रहना होगा
भाई से डर के रहना होगा |

जात हमारी पहचान नही है
पीहर हमारा घर नही है |

कोई राक्षसों जैसे तुम्हे प्रताडेगा
कोई आँखो से बलात्कार करेगा |

खुद कोई शौक ना पालना
बीवी बनके घर संभालना |

उम्र भर हमे कोसा जाएगा
अहम के नीचे कुचला जाएगा |

चुप्पी साधे रहना होगा
सब कुछ तुमको सहना होगा |

आगे भी कुछ सुनना चाहती हो 
अभी भी दुनिया मे आना चाहती हो ?

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