गर्भ से आई एक आवाज़
माँ तुम मुझसे क्यूँ हो नाराज़ |
पाप क्या ऐसा मेने किया
कि हो रही मेरी भ्रूण हत्या |
इस दुनिया मे आना चाहती हूँ
रंगो मे रंग जाना चाहती हूँ |
कुछ पाना है, कुछ बनना है
दुनिया में कुछ करके जाना है |
बेटी, पाप तुमने कोई नही किया
पर दुनिया का अन्याय भी नहीं सहा |
माना हम है जन्म दाता
लेकिन कहाँ कोई हमारी सुनता |
इस दुनिया में तुम कदम रखलो
उससे पहले औरत की व्यथा सुनलो |
बाप से सहम के रहना होगा
भाई से डर के रहना होगा |
जात हमारी पहचान नही है
पीहर हमारा घर नही है |
कोई राक्षसों जैसे तुम्हे प्रताडेगा
कोई आँखो से बलात्कार करेगा |
खुद कोई शौक ना पालना
बीवी बनके घर संभालना |
उम्र भर हमे कोसा जाएगा
अहम के नीचे कुचला जाएगा |
चुप्पी साधे रहना होगा
सब कुछ तुमको सहना होगा |
आगे भी कुछ सुनना चाहती हो
अभी भी दुनिया मे आना चाहती हो ?
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