मैं एक आम इंसान हूँ,
दो वक़्त की रोटी के लिए
रोज़ नौ घंटे की नौकरी करता हूँ |
एक आज़ाद देश का नागरिक हूँ,
पर गुलामी की बेड़ियों से निकलने के लिए
आए दिन आंदोलन करता हूँ |
हर पाँच साल में सरकार चुनता हूँ,
और अगले पाँच साल तख्ता पलट हो
ये ख्वाब देखता हूँ |
अन्ना के हर अनशन की रैली में जाता हूँ,
और पकड़े जाने पे अगले ही दिन,
रिशवत देके छुटकारा पाता हूँ |
हर रविवार आमिर के साथ,
डेढ़ घंटे मे सब बदलने के ख्वाब देखता हूँ,
फिर अगले रविवार 'सत्यमेव जयते' के प्रसारण का इंतज़ार करता हूँ |
किसी लड़की की भ्रूण हत्या, रेप, मोलेस्टेशन की खबरसुनके
फेसबुक पर जस्टीस फॉर वूमन के कमेंट लिखता हूँ
अगली बड़ी खबर आने तक, उसपे लाइक गिनता हूँ |
ना जाने कितनी ऐसी बातें है, जिनको जहन में भरा है
चिंतन किया है, और शायद यह निष्कर्ष निकाल पाया हूँ कि ...
मैं एक हिंदुस्तानी हूँ, 65 बरस का हो गया हूँ,
पर आज भी 15 अगस्त, 26 जनवरी को
52 सेकंड के जन गन मन की ज़िंदगी जीता हूँ |
ultimate dear...........like as panni da rang
ReplyDeleteI liked it
ReplyDeletereal story of aam aadmi...
ReplyDelete