जहाँ पूरा तंत्र सरकार की बैसाखी पे खड़ा है
सरकार, गण के मतों की बैसाखी पे खड़ी है
और गण समस्या के समाधान के लिए,
सरकार को बैसाखी बनाए लाइन मे खड़ा है|
वही गण मत ना देने की लापरवाही मे पड़ा है
अगर वह तंत्र सुचारू नही चल रहा
तो इसका दुखड़ा रोने मे वो सबसे आगे बढ़ा है
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