Sunday, May 10, 2020

हवाई सपने

वो हवाई चप्पल वालो को
हवाई जहाज़ का सपना बेचा था

उनकी हवाई चप्पलें घिस गई
अपने सपने पूरे करते करते

वो हवाई जहाज़ तो उन्हें ही नसीब हुआ
जो हवाई चप्पल में सफर ना करते थे

वो दो वक्त की रोटी कमाने
घर बार अपने छोड़ निकले थे

वो दो वक्त की ही रोटी के संग
फिर अपने घर को लौट रहे थे

जिस पटरी को, जिस रेल को
बड़ी मेहनत से उन्होंने बनाया था

उसी पटरी पे , उसी रेल से
अपने घर को लौटना चाहा था

उसी पटरी पे, उसी रेल से
वो अपने घर ना लौट सके

उसी पटरी पे, उसी रेल ने
वो सपने उनके कुचल दिए |


अंकित कोचर 

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