सूखे से त्रस्त गाँव में
सभी आँखे टकटकी लगाए
टेंकर का इंतज़ार करती है
कि टेंकर आएगा
दो घूँट गले मे पानी उतरेगा
और दो शब्द मुँह से निकलेंगे
पर बाबा, आज भी गाँव मे
डाकिये की ताक में रहते है
जब भी आता है,
सूखे पड़े गले से ही पूछ लेते है
"अमरीका से कोई चिठ्ठी आई है ?"
अब भला वो नही जानते
चिट्ठियों को थोड़े ना कोई
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