Wednesday, December 5, 2012

चिठ्ठी


सूखे से त्रस्त गाँव में
सभी आँखे टकटकी लगाए
टेंकर का इंतज़ार करती है

कि टेंकर आएगा
दो घूँट गले मे पानी उतरेगा
और दो शब्द मुँह से निकलेंगे

पर बाबा, आज भी गाँव मे
डाकिये की ताक में रहते है
जब भी आता है,
सूखे पड़े गले से ही पूछ लेते है

"अमरीका से कोई चिठ्ठी आई है ?"  
अब भला वो नही जानते
चिट्ठियों को थोड़े ना कोई
फ़ेसबुक पे शेयर कर सकते है |

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