वो जो सीधा रास्ता था चलता
जो बाईं और था करवट लेता
उसी मोड़ पे था एक चबूतरा
जहाँ हमेशा मैं तुमसे मिलता
जहाँ कभी उन पेड़ो के नीचे
लम्हो के कुछ बीज थे बोए
ख्वाब देखे थे इनको हम सींचे
अब है हमने ये सपने खोए
जहाँ कभी बातों की बिगुल से
कुछ थे हमने संगीत संजोए
देखो तो अब लगे मुरझे से
हमने अब वो लम्हे खो दिए
सोचा था फिर लौट आएँगे
तुमसे हम फिर वही मिलेंगे
पर वहाँ कभी लौट के ना जाना
हमसे कभी फिर तुम ना मिलना
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