मुझे तेरी याद आती है
ऐसे ही जब तन्हा होता हूँ
तेरा गुस्सा याद आता है
सवेरे जब कड़क चाय पीता हूँ
तेरी आँखे याद आती है
जब सूरज उगते हुए देखता हूँ
तेरी महक याद आती है
जब बाग मे सैर करने जाता हूँ
तेरी जुल्फे याद आती है
जब पेड़ की छाँव मे आराम करता हूँ
तेरी आवाज़ सुनाई देती है
जब पेड़ पे कोयल कूहु कूहु करती है
तेरा स्पर्श सा लगता है
जब मखमल के गलीचे पे बैठता हूँ
तेरी चाल याद आती है
जब बिल्ली रास्ता काटती है
तेरा चेहरा सामने आता है
जब चाँद निकल के आता है
मुझे तेरी याद आती है
ऐसे ही जब कुछ पंक्तियाँ बुनता हूँ
मुझे तेरी याद आती है
ऐसे ही जब तन्हा होता हूँ |
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