Thursday, September 6, 2012

याद


मुझे तेरी याद आती है
ऐसे ही जब तन्हा होता हूँ

तेरा गुस्सा याद आता है
सवेरे जब कड़क चाय पीता हूँ

तेरी आँखे याद आती है
जब सूरज उगते हुए देखता हूँ

तेरी महक याद आती है
जब बाग मे सैर करने जाता हूँ

तेरी जुल्फे याद आती है
जब पेड़ की छाँव मे आराम करता हूँ

तेरी आवाज़ सुनाई देती है
जब पेड़ पे कोयल कूहु कूहु करती है

तेरा स्पर्श सा लगता है
जब मखमल के गलीचे पे बैठता हूँ

तेरी चाल याद आती है
जब बिल्ली रास्ता काटती है

तेरा चेहरा सामने आता है
जब चाँद निकल के आता है

मुझे तेरी याद आती है
ऐसे ही जब कुछ पंक्तियाँ बुनता हूँ

मुझे तेरी याद आती है
ऐसे ही जब तन्हा होता हूँ |

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