Wednesday, September 5, 2012

बहाना

ख्वाबों से है रिश्ता बहुत पुराना
जैसे उसकी एक नज़र है चुराना

ऐसी आदत है हमको पड़ी
दिखे हर वक्त वो सामने खड़ी

आँखे है, खुली हो या बंद
लगे की अब वो है रज़ामंद

ये तो बस ख्वाब ही है देखती
नींद का तो बस बहाना है करती |

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