Monday, December 17, 2012

परेशान

कुछ परेशान हूँ
उसने, जिसने अभी लिखना भी नही सीखा
उसका शोक संदेश कैसे लिखूं ?

जैसे तैसे लिख भी दूँ,
तो उन माँ-बाप के दिल का
हाल कैसे महसूस करूँ ?

दिल का हाल समझ भी लूँ
तो, दूसरे देश की छोड़, अपने की सोच
ऐसा बोलने वालो को क्या जवाब दूं ?

और अपने देश में,
किसी माँ की कोख से निकला,
किसी बहन का भाई
जब खुले आम बलात्कार करे,
तो उस लड़की को कैसे इंसानियत मे विश्वास दिलाऊं
और धरती पर पल रहे इन हैवानों को कैसे इंसान समझुँ ?

Wednesday, December 5, 2012

चिठ्ठी


सूखे से त्रस्त गाँव में
सभी आँखे टकटकी लगाए
टेंकर का इंतज़ार करती है

कि टेंकर आएगा
दो घूँट गले मे पानी उतरेगा
और दो शब्द मुँह से निकलेंगे

पर बाबा, आज भी गाँव मे
डाकिये की ताक में रहते है
जब भी आता है,
सूखे पड़े गले से ही पूछ लेते है

"अमरीका से कोई चिठ्ठी आई है ?"  
अब भला वो नही जानते
चिट्ठियों को थोड़े ना कोई
फ़ेसबुक पे शेयर कर सकते है |

Sunday, December 2, 2012

तलाश


हर सुबह नहा धो कर 
शहर से दूर, 
उँची इमारतों के जंगल में 
मुखौटे पहन के
झूठी मुस्कानें चढ़ाके
ना जाने कौन कौन 
भटकते रहते है वहाँ  

वो जंगल बड़ा लुभावना है 
शीशे लगे है इमारतों पे 
वातानुकूलित कमरे है

पर वहाँ बैठ के हर कोई,
फोन, पिंग, और मेल पे
सामने वाले का काटते है 

ना जाने किस तलाश में 
रोज़ खुदको ही खोते रहते है 
और, हर सुबह उठ, नहा धो कर 
शहर से दूर, इमारतों के जंगल में 
एक मौत वो मरते है |

Thursday, November 29, 2012

Honor Killing


क्या गुनाह किया था उन्होने
एक ब्याह ही तो रचाया था

कत्ल कर दिया, ना सिर्फ़ उनका
बल्कि उस अजन्मी औलाद का भी

शायद एक होनहार लाल पैदा होता
और तुम्हारी ही बेटी से ब्याह रचाता

वाह रे वाह, क्या ग़ज़ब वार किया
एक तीर मे ना जाने कितनों का शिकार किया

एक माँ से बेटा-बहू, एक औलाद को अनाथ
और अपनी ही बेटी को विधवा कर दिया

सच में, क्या गुनाह किया था उन्होने
एक ब्याह ही तो रचाया था ?

नीची बिरादरी का बतलाकर बात टालते हो
और कतल करके खुद को उँचा समझते हो |

Wednesday, November 28, 2012

भारत भविष्य


जर्जर हो चुकी वो इमारत
जहाँ छत टपकती रहती है
किच-किच करती खटिया पे
माँ बच्चे को जनम देती है

सरकारी दफ़्तर के खातों में
नाम दर्ज हो जाता है
जहाँ बाबू लोगों से ज़्यादा
दीमक निवास करती है

उबड़ खाबड़ ब्लैक बोर्ड पे
घिसे चाक के टुकड़ो से
पक्की सड़को के बनने के
नैनो में जो सपने भरते है

हाँ, इसी विशाल भारत में
एक ऐसा भी भारत बसता है
जिसका खुदका कोई भविष्य नहीं
पर वो भारत का भविष्य कहलाता है |

Tuesday, November 27, 2012

गणतंत्र


जहाँ पूरा तंत्र सरकार की बैसाखी पे खड़ा है
सरकार, गण के मतों की बैसाखी पे खड़ी है 
और गण समस्या के समाधान के लिए, 
सरकार को बैसाखी बनाए लाइन मे खड़ा है|

वही गण मत ना देने की लापरवाही मे पड़ा है 
अगर वह तंत्र सुचारू नही चल रहा
तो इसका दुखड़ा रोने मे वो सबसे आगे बढ़ा है

Saturday, November 24, 2012

गाँधी


हिंसा करता जगत फिरू
एक अहिंसक की चाह में

मार काट है मचा रखी
एक अहिंसक की चाह में

दीप जलाऊं माँ लक्ष्मी के
एक 'गाँधी' की चाह में |